कुरान - 8:29 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِن تَتَّقُواْ ٱللَّهَ يَجۡعَل لَّكُمۡ فُرۡقَانٗا وَيُكَفِّرۡ عَنكُمۡ سَيِّـَٔاتِكُمۡ وَيَغۡفِرۡ لَكُمۡۗ وَٱللَّهُ ذُو ٱلۡفَضۡلِ ٱلۡعَظِيمِ

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo in tattaqul laaha yaj'al lakum furqaananw wa yukaffir 'ankum saiyi aatikum wa yaghfir lakum; wallaahu zul fadlil 'azeem)

ऐ ईमान वालों! अगर तुम अल्लाह से डरोगे तो वह तुम्हें एक फ़ुरक़ान देगा [60],
ताकि तुम हक़ और बातिल में फ़र्क़ कर सको।
और तुम्हारे गुनाह मिटा देगा [61],
और तुम्हें माफ़ कर देगा।
और अल्लाह बड़ा फ़ज़ल करने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 29 की तफ़्सीर

✅ [60] तक़वा से फ़ुरक़ान (पहचान की ताक़त)

इस आयत में बताया गया कि तक़वा इंसान को
सच्चाई और झूठ, हक़ और बातिल में फ़र्क़ करने की
ताक़त देता है।
ईमानदार का दिल अल्लाह की तरफ़ झुकता है
और ग़लत बात से दूर रहता है।

✅ [61] तक़वा गुनाहों को मिटा देता है

जो शख़्स तक़वा अपनाता है,
अल्लाह उसके गुनाहों को माफ़ कर देता है
और नेकी के ज़रिए उसे पाक कर देता है।
यही तक़वा इंसान को अल्लाह की रहमत और फ़ज़ल का हक़दार बनाता है।

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