Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa takhoonal laaha war Rasoola wa takhoonooo amaanaatikum wa antum ta'lamoon)
अल्लाह और उसके रसूल ﷺ से ख़ियानत का मतलब है –
अल्लाह के हुक्मों को तोड़ना,
फर्ज़ और जिम्मेदारियों को नज़रअंदाज़ करना,
या इस्लाम के नाम पर दी गई ज़िम्मेदारी पूरी न करना।
यह सिर्फ़ नाफ़रमानी नहीं बल्कि ईमान के अहद को तोड़ना है।
इस आयत में ख़ास तौर पर अमानत का हुक्म है।
चाहे वह माल की अमानत हो,
किसी का राज़ हो,
या दीन और उम्मत की जिम्मेदारी हो।
जान-बूझकर अमानत में ख़ियानत करना बड़ा गुनाह है।
ईमानदार मुसलमान को हर हाल में सच्चा और जिम्मेदार रहना चाहिए।
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