कुरान - 8:27 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَخُونُواْ ٱللَّهَ وَٱلرَّسُولَ وَتَخُونُوٓاْ أَمَٰنَٰتِكُمۡ وَأَنتُمۡ تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa takhoonal laaha war Rasoola wa takhoonooo amaanaatikum wa antum ta'lamoon)

ऐ ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूूल से ख़ियानत न करो [56],
और अपनी अमानतों में भी (जानते-बूझते) ख़ियानत न करो [57]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 27 की तफ़्सीर

✅ [56] अल्लाह और रसूल से ख़ियानत

अल्लाह और उसके रसूल ﷺ से ख़ियानत का मतलब है –
अल्लाह के हुक्मों को तोड़ना,
फर्ज़ और जिम्मेदारियों को नज़रअंदाज़ करना,
या इस्लाम के नाम पर दी गई ज़िम्मेदारी पूरी न करना।
यह सिर्फ़ नाफ़रमानी नहीं बल्कि ईमान के अहद को तोड़ना है।

✅ [57] अमानत में ख़ियानत से बचना

इस आयत में ख़ास तौर पर अमानत का हुक्म है।
चाहे वह माल की अमानत हो,
किसी का राज़ हो,
या दीन और उम्मत की जिम्मेदारी हो।
जान-बूझकर अमानत में ख़ियानत करना बड़ा गुनाह है।
ईमानदार मुसलमान को हर हाल में सच्चा और जिम्मेदार रहना चाहिए।

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