कुरान - 8:26 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
وَٱذۡكُرُوٓاْ إِذۡ أَنتُمۡ قَلِيلٞ مُّسۡتَضۡعَفُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ تَخَافُونَ أَن يَتَخَطَّفَكُمُ ٱلنَّاسُ فَـَٔاوَىٰكُمۡ وَأَيَّدَكُم بِنَصۡرِهِۦ وَرَزَقَكُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَٰتِ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ

Transliteration: (Wazkurooo iz antum qaleelum mustad 'afoona filardi takhaafoona ai yatakhat tafakumun naasu fa aawaakum wa aiyadakum binasrihee wa razaqakum minat taiyibaati la'allakum tashkuroon)

और याद करो जब तुम बहुत कमज़ोर और ज़मीन में कम तादाद में थे,
डरते थे कि लोग तुम्हें कहीं उठा न ले जाएँ [54]।
फिर अल्लाह ने तुम्हें पनाह दी,
अपनी नुसरत से तुम्हारी मदद की,
और तुम्हें पाक रोज़ी अता की [55],
ताकि तुम शुक्र अदा करो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 26 की तफ़्सीर

✅ [54] पिछली बेबसी याद करना शुक्र है

यह आयत मुहाजिरीन को ख़िताब है।
हिजरत से पहले मक्का में वे कमज़ोर, मजबूर और हमेशा दुश्मनों के डर में रहते थे।
अल्लाह अपनी नेमतों को याद दिलाता है ताकि इंसान शुक्रगुज़ार बने और घमंड से बचे।

✅ [55] हिजरत के बाद अल्लाह की नेमतें

अल्लाह ने उन्हें मदीना में पनाह दी,
अन्सार के ज़रिए सहारा दिया,
और फिर ग़नीमत के माल और पाक रोज़ियों से नवाज़ा।
मदीना की ज़िंदगी और अल्लाह की नुसरत,
दोनों उनके लिए बड़ी नेमतें थीं।

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