कुरान - 8:25 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
وَٱتَّقُواْ فِتۡنَةٗ لَّا تُصِيبَنَّ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنكُمۡ خَآصَّةٗۖ وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ

Transliteration: (Wattaqoo fitnatal laa tuseebannal lazeena zalamoo minkum khaaaassatanw wa'lamooo annal laaha shadeedul 'iqaab)

और उस फ़ित्ना [53] से बचो,
जो सिर्फ़ तुममें से ज़ालिमों ही पर नहीं पड़ेगा,
और जान लो कि अल्लाह का अज़ाब बहुत सख़्त है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 25 की तफ़्सीर

✅ [53] सामूहिक गुनाह पर सामूहिक अज़ाब

यहाँ चेतावनी है कि जब गुनाह आम हो जाएँ,
और लोग नेकी का हुक्म देना और बुराई से रोकना छोड़ दें,
तो अल्लाह का अज़ाब सिर्फ़ ज़ालिमों पर ही नहीं,
बल्कि पूरे समाज पर आ सकता है।

अगर नेक लोग भी चुप रहें और सामूहिक ज़िम्मेदारी अदा न करें,
तो वे भी अज़ाब से महफ़ूज़ नहीं रहेंगे।
इसलिए समाज में बुराई को फैलने देना,
पूरे जहाज़ में सुराख़ करने जैसा है
जो सबको डुबो देता है।

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