कुरान - 8:24 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱسۡتَجِيبُواْ لِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ إِذَا دَعَاكُمۡ لِمَا يُحۡيِيكُمۡۖ وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ يَحُولُ بَيۡنَ ٱلۡمَرۡءِ وَقَلۡبِهِۦ وَأَنَّهُۥٓ إِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanus tajeeboo lillaahi wa lir Rasooli izaa da'aakum limaa yuhyeekum wa'lamooo annal laaha yahoolu bainal mar'i wa qalbihee wa anahooo ilaihi tuhsharoon)

ऐ ईमान वालों! अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की पुकार पर लब्बैक कहो [49],
जब वह तुम्हें उस चीज़ की तरफ़ बुलाएँ जो तुम्हें ज़िन्दगी देती है [50]।
और जान लो कि अल्लाह आदमी और उसके दिल के दरमियान हस्तक्षेप करता है [51],
और तुम्हें उसी की तरफ़ इकठ्ठा किया जाएगा [52]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 24 की तफ़्सीर

✅ [49] नबी ﷺ की पुकार पर फ़ौरन लब्बैक

रसूल ﷺ की पुकार हक़ीक़त में अल्लाह की पुकार है।
मोमिन का फ़र्ज़ है कि जब भी बुलाया जाए,
तो फ़ौरन हाज़िर हो, चाहे वह नमाज़ में हो।
यह नबी ﷺ की अज़मत और इत्तिबा का हुक्म है।

✅ [50] असली ज़िन्दगी देने वाली पुकार

नबी ﷺ की दावत ऐसी है जो रूह को ज़िन्दगी देती है।
चाहे वह क़ुरआन, हदीस, ईमान या जिहाद की दावत हो।
यही असली हयात है, और इसे क़बूल करना हयात-ए-अबदी का ज़रिया है।

✅ [51] दिलों पर अल्लाह का क़ब्ज़ा

अल्लाह इंसान और उसके दिल के बीच हाइल हो जाता है।
वह चाहें तो नीयत बदल देता है या इंसान को अमल से रोक देता है।
इसलिए देर करने की बजाय हुक्म पर फ़ौरन अमल करना ज़रूरी है।

✅ [52] आख़िरी वापसी अल्लाह ही की तरफ़

आख़िरकार सबको अल्लाह की तरफ़ लौटना है।
मौत अचानक भी आ सकती है और इरादे बीच में टूट सकते हैं।
इसलिए रसूल ﷺ की दावत को टालना जहालत और नुक़सान है।

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