कुरान - 8:32 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
وَإِذۡ قَالُواْ ٱللَّهُمَّ إِن كَانَ هَٰذَا هُوَ ٱلۡحَقَّ مِنۡ عِندِكَ فَأَمۡطِرۡ عَلَيۡنَا حِجَارَةٗ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ أَوِ ٱئۡتِنَا بِعَذَابٍ أَلِيمٖ

Transliteration: (Wa iz qaalul laahumma in kaana haazaa huwal haqqa min 'indika fa amtir 'alainaa hijaaratam minas samaaa'i awi'tinaa bi 'azaabin aleem)

और जब उन्होंने कहा:
"ऐ अल्लाह! अगर यह सचमुच तेरी तरफ़ से है,
तो हम पर आसमान से पत्थर बरसा दे [65],
या कोई दर्दनाक अज़ाब हम पर ले आ।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 32 की तफ़्सीर

✅ [65] घमंड और हठ से की गई दुआ

यह आयत नज़्र बिन हारिस और उसके साथियों के बारे में नाज़िल हुई।
उन्होंने झूठे घमंड और दिखावे में
ऐसा कहा, मानो उन्हें हक़ पर पूरा यक़ीन है।
असल में यह कोई सच्ची दुआ नहीं थी,
बल्कि ताक़ब्बुर और इंकार का इज़हार था।
उनका मक़सद यह था कि
लोगों के सामने कुरआन की सच्चाई को कमज़ोर दिखाएँ
और दूसरों को गुमराह करें।
यह उनकी सख़्त दिली और कुफ़्र की हद को बयान करता है,
कि सच सामने होते हुए भी
उन्होंने अल्लाह की सज़ा को ललकारा।

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