Transliteration: (Wa maa kaana Salaatuhum 'indal Baiti illa mukaaa anw-wa tasdiyah; fazooqul 'azaaba bimaa kuntum takfuroon)
यह आयत क़ुरैश की बिगड़ी हुई आदत की निंदा करती है कि वे काबा के पास सीटी बजाते और तालियाँ पीटते थे और इसे इबादत समझते थे। वे ऐसा हज़रत नबी ﷺ की असली नमाज़ को परेशान करने के लिए भी करते थे। यह बताता है कि ऐसी ख़ाली हरकतें इबादत नहीं बल्कि मज़ाक और अज्ञानता हैं।
यहाँ का अज़ाब उनकी बद्र की शिकस्त, कैद और रुसवाई को बयान करता है। लेकिन इस दुनिया की सज़ा से उनकी आख़िरत की सज़ा कम नहीं होगी। यह बताता है कि कुफ़्र और दीन का मज़ाक उड़ाना दोनों दुनिया और आख़िरत में अज़ाब का कारण बनता है।
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