कुरान - 8:35 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
وَمَا كَانَ صَلَاتُهُمۡ عِندَ ٱلۡبَيۡتِ إِلَّا مُكَآءٗ وَتَصۡدِيَةٗۚ فَذُوقُواْ ٱلۡعَذَابَ بِمَا كُنتُمۡ تَكۡفُرُونَ

Transliteration: (Wa maa kaana Salaatuhum 'indal Baiti illa mukaaa anw-wa tasdiyah; fazooqul 'azaaba bimaa kuntum takfuroon)

उनकी नमाज़ ख़ाना-ए-काबा के पास कुछ और नहीं बल्कि सीटी बजाना और तालियाँ बजाना थी [70]। तो अब चखो अज़ाब [71] अपने कुफ़्र के बदले। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 35 की तफ़्सीर

✅ [70] इबादत के नाम पर मज़ाक

यह आयत क़ुरैश की बिगड़ी हुई आदत की निंदा करती है कि वे काबा के पास सीटी बजाते और तालियाँ पीटते थे और इसे इबादत समझते थे। वे ऐसा हज़रत नबी ﷺ की असली नमाज़ को परेशान करने के लिए भी करते थे। यह बताता है कि ऐसी ख़ाली हरकतें इबादत नहीं बल्कि मज़ाक और अज्ञानता हैं।

✅ [71] दुनियावी और आख़िरती अज़ाब

यहाँ का अज़ाब उनकी बद्र की शिकस्त, कैद और रुसवाई को बयान करता है। लेकिन इस दुनिया की सज़ा से उनकी आख़िरत की सज़ा कम नहीं होगी। यह बताता है कि कुफ़्र और दीन का मज़ाक उड़ाना दोनों दुनिया और आख़िरत में अज़ाब का कारण बनता है।

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