Transliteration: (Innal lazeena kafaroo yunfiqoona amwaalahum liyasuddoo 'an sabeelil laah; fasayunfiqoonahaa summa takoonu 'alaihim hasratan summa yughlaboon; wal lazeena kafarooo ilaa Jahannnama yuhsharoona)
यह आयत उन क़ुरैश सरदारों पर उतरी जिन्होंने बद्र के लिए भारी माल खर्च किया। रोज़ दस ऊँट ज़बह करके अपने लश्कर को खिलाते थे। अल्लाह ने बताया कि ऐसा माल खर्च करना दरअसल इस्लाम के ख़िलाफ़ दुश्मनी है। आज भी जो लोग अपने धन को गुमराही और दीन विरोधी कामों में लगाते हैं, वे इसी आयत के हुक्म में आते हैं।
वे खर्च करते रहेंगे मगर उसका कोई फ़ायदा न होगा। उनका माल ही उनके लिए रुसवाई और अफ़सोस का कारण बनेगा।
अल्लाह ने फ़रमाया कि वे मात खाएँगे। चाहे वह बद्र की तरह सीधी शिकस्त हो या धीरे-धीरे उनके निज़ाम का पतन। आख़िरकार ग़लबा सिर्फ़ ईमान वालों का होगा।
क़ियामत के दिन काफ़िरों को गुच्छों की शक्ल में जमा करके जहन्नम की तरफ़ ले जाया जाएगा। यह उनके लिए ज़लील करने वाली सज़ा होगी। इसके मुक़ाबले ईमान वाले गुनहगार अगर सज़ा पाएँगे भी तो वह इन्फ़िरादी होगी ताकि रुसवाई से बचे रहें।
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