कुरान - 8:38 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ إِن يَنتَهُواْ يُغۡفَرۡ لَهُم مَّا قَدۡ سَلَفَ وَإِن يَعُودُواْ فَقَدۡ مَضَتۡ سُنَّتُ ٱلۡأَوَّلِينَ

Transliteration: (Qul lillazeena kafarooo iny yantahoo yughfar lahum maa qad salafa wa iny ya'oodoo faqad madat sunnatul awwaleen)

कह दो उन काफ़िरों से कि अगर वे बाज़ आ जाएँ, तो जो कुछ पहले हो चुका है, उसे माफ़ कर दिया जाएगा [78]। लेकिन अगर वे फिर उसी (कुफ़्र) की तरफ़ लौटें, तो उनके पहले गुज़रे हुए लोगों का अंजाम सामने आ चुका है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 38 की तफ़्सीर

✅ [78] इस्लाम से गुज़रा हुआ सब माफ़

यहाँ काफ़िरों को उम्मीद और रहमत का पैग़ाम दिया गया है। अगर वे कुफ़्र और दुश्मनी छोड़कर इस्लाम स्वीकार कर लें, तो उनके पिछले तमाम गुनाह—चाहे शिर्क हों या बग़ावत—सब माफ़ कर दिए जाएँगे। इस्लाम में दाख़िल होने से अल्लाह के हुक़ूक़ से जुड़ी सारी पिछली कमियाँ मिट जाती हैं, लेकिन बंदों के हुक़ूक़ (जैसे कर्ज़) फिर भी अदा करने होंगे। और अगर वे पुराने रास्ते पर लौटते हैं, तो उन्हें वही अंजाम मिलेगा जो आद, सामूद और फ़िरऔन की क़ौमों को मिला था।

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