Transliteration: (Qul lillazeena kafarooo iny yantahoo yughfar lahum maa qad salafa wa iny ya'oodoo faqad madat sunnatul awwaleen)
यहाँ काफ़िरों को उम्मीद और रहमत का पैग़ाम दिया गया है। अगर वे कुफ़्र और दुश्मनी छोड़कर इस्लाम स्वीकार कर लें, तो उनके पिछले तमाम गुनाह—चाहे शिर्क हों या बग़ावत—सब माफ़ कर दिए जाएँगे। इस्लाम में दाख़िल होने से अल्लाह के हुक़ूक़ से जुड़ी सारी पिछली कमियाँ मिट जाती हैं, लेकिन बंदों के हुक़ूक़ (जैसे कर्ज़) फिर भी अदा करने होंगे। और अगर वे पुराने रास्ते पर लौटते हैं, तो उन्हें वही अंजाम मिलेगा जो आद, सामूद और फ़िरऔन की क़ौमों को मिला था।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat