कुरान - 8:40 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
وَإِن تَوَلَّوۡاْ فَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ مَوۡلَىٰكُمۡۚ نِعۡمَ ٱلۡمَوۡلَىٰ وَنِعۡمَ ٱلنَّصِيرُ

Transliteration: (Wa in tawallaw fa'lamooo annal laaha mawlaakum; ni'mal mawlaa wa ni'man naseer (End Juz 9))

फिर अगर वे मुंह मोड़ लें, तो जान लो कि अल्लाह तुम्हारा सरपरस्त है। वह कितना बेहतरीन सरपरस्त और कितना बेहतरीन मददगार है [81]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 40 की तफ़्सीर

✅ [81] अल्लाह ही काफ़ी है मोमिनों के लिए

इस आयत में मुसलमानों को तसल्ली दी गई है कि अगर काफ़िर हक़ से मुँह मोड़ लें, तो भी अल्लाह ही तुम्हारा असली हामी व नासिर है। उसका सहारा और उसकी मदद सबसे बेहतरीन है। नबियों और औलिया के ज़रिये मिलने वाली मदद भी दरअसल उसी की तरफ़ से होती है, क्योंकि हर मदद उसी की इजाज़त और ताक़त से है। इसीलिए मोमिनों के लिए अल्लाह की कफ़ालत ही सबसे बड़ी गारंटी है।

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