Transliteration: (Wa qaatiloohum hattaa laa takoona fitnatunw wa yakoonaddeenu kulluhoo lillaah; fainin tahaw fa innallaaha bimaa ya'maloona Baseer)
इस आयत से साफ़ होता है कि जिहाद का उद्देश्य किसी को जब्रन मुसलमान बनाना नहीं, बल्कि कुफ़्र और ज़ुल्म की हुकूमत को तोड़ना है, जो इस्लाम की राह में रुकावट पैदा करती है। यहाँ "फ़साद" से मुराद काफ़िरों की हक़ व दुशमनी और रोक-टोक है।
मक़सद यह है कि दीन पूरी तरह अल्लाह के लिए हो—यानी इस्लाम को बिना किसी रुकावट के फैलने और अमल में लाने की आज़ादी मिले। जब काफ़िर बाज़ आ जाएँ, चाहे सुलह कर लें, इस्लाम क़ुबूल कर लें, या जिज़्या अदा करें—तो जिहाद रोक देना चाहिए। अल्लाह सब कुछ जानता और देखता है।
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