कुरान - 8:39 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
وَقَٰتِلُوهُمۡ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتۡنَةٞ وَيَكُونَ ٱلدِّينُ كُلُّهُۥ لِلَّهِۚ فَإِنِ ٱنتَهَوۡاْ فَإِنَّ ٱللَّهَ بِمَا يَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ

Transliteration: (Wa qaatiloohum hattaa laa takoona fitnatunw wa yakoonaddeenu kulluhoo lillaah; fainin tahaw fa innallaaha bimaa ya'maloona Baseer)

और उनसे लड़ो यहाँ तक कि फ़साद बाक़ी न रहे [79], और दीन पूरी तरह सिर्फ़ अल्लाह के लिए हो जाए [80]। फिर अगर वे बाज़ आ जाएँ, तो बेशक अल्लाह उनकी करतूतों को देखने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 39 की तफ़्सीर

✅ [79] जिहाद का मक़सद फ़साद मिटाना है

इस आयत से साफ़ होता है कि जिहाद का उद्देश्य किसी को जब्रन मुसलमान बनाना नहीं, बल्कि कुफ़्र और ज़ुल्म की हुकूमत को तोड़ना है, जो इस्लाम की राह में रुकावट पैदा करती है। यहाँ "फ़साद" से मुराद काफ़िरों की हक़ व दुशमनी और रोक-टोक है।

✅ [80] दीन सिर्फ़ अल्लाह के लिए

मक़सद यह है कि दीन पूरी तरह अल्लाह के लिए हो—यानी इस्लाम को बिना किसी रुकावट के फैलने और अमल में लाने की आज़ादी मिले। जब काफ़िर बाज़ आ जाएँ, चाहे सुलह कर लें, इस्लाम क़ुबूल कर लें, या जिज़्या अदा करें—तो जिहाद रोक देना चाहिए। अल्लाह सब कुछ जानता और देखता है।

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