कुरान - 8:59 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
وَلَا يَحۡسَبَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ سَبَقُوٓاْۚ إِنَّهُمۡ لَا يُعۡجِزُونَ

Transliteration: (Wa laa yahsabannal lazeena kafaroo sabaqooo; innahum laa yu'jizoon)

और कुफ़्फ़ार (काफ़िर) यह गुमान न करें कि वे हमारे क़ाबू से निकल गए हैं [132]। बेशक, वे (कभी) बच नहीं सकते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 59 की तफ़्सीर

✅ [132] अल्लाह की पकड़ से कोई बाहर नहीं

यह आयत उन कुफ़्फ़ार के बारे में है जो ग़ज़वा-ए-बद्र से भाग निकले थे। उन्हें यह गुमान न करना चाहिए कि वे अल्लाह की पकड़ से बच गए हैं।

  • उनकी फ़रार सिर्फ़ अस्थायी है, मगर वे हमेशा के लिए अल्लाह के क़ाबू से बाहर नहीं हो सकते।
  • अल्लाह की हुकूमत और तसल्लुत हर जगह है।
  • न बीमार होकर फिर सही होने वाला, न मुसीबत से निकलने वाला और न ही लड़ाई से भागने वाला—कोई भी अल्लाह की गिरफ़्त से आज़ाद नहीं।

यह आयत इंसान को ख़बरदार करती है कि अल्लाह की क़ुदरत से भाग कर कहीं शरण नहीं ली जा सकती।

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