Transliteration: (Wa immaa takhaafana min qawmin khiyaanatan fambiz ilaihim 'alaa sawaaa'; innal laaha laayuhibbul khaaa'ineen)
इस आयत में यह हुक्म दिया गया है कि अगर किसी क़ौम के बारे में पक्के आसार और अलामात नज़र आने लगें कि वह मुआहदा तोड़ने वाली है, तो मुसलमानों को हक़ है कि वह भी खुले तौर पर मुआहदा ख़त्म कर दें।
अल्लाह तआ़ला ने साफ़ फ़रमा दिया कि वह ख़ियानत करने वालों को पसन्द नहीं करता।
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