कुरान - 8:58 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَإِمَّا تَخَافَنَّ مِن قَوۡمٍ خِيَانَةٗ فَٱنۢبِذۡ إِلَيۡهِمۡ عَلَىٰ سَوَآءٍۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلۡخَآئِنِينَ

Transliteration: (Wa immaa takhaafana min qawmin khiyaanatan fambiz ilaihim 'alaa sawaaa'; innal laaha laayuhibbul khaaa'ineen)

और अगर तुम्हें किसी क़ौम की तरफ़ से ख़ियानत का ख़ौफ़ हो तो उनके एहद (मुआहदा) को बराबरी की बुनियाद पर उनके सामने फेंक दो [131]। बेशक, अल्लाह ख़ियानत करने वालों को पसन्द नहीं करता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 58 की तफ़्सीर

✅ [131] एहद तोड़ने का शरीअती उसूल

इस आयत में यह हुक्म दिया गया है कि अगर किसी क़ौम के बारे में पक्के आसार और अलामात नज़र आने लगें कि वह मुआहदा तोड़ने वाली है, तो मुसलमानों को हक़ है कि वह भी खुले तौर पर मुआहदा ख़त्म कर दें।

  • मगर यह काम गुपचुप या अचानक हमला करके नहीं किया जाएगा, बल्कि इलान करके किया जाएगा।
  • इस्लाम धोखे और मक्कारी की इजाज़त नहीं देता।
  • मक़सद यह है कि दुश्मन को भी साफ़ मालूम हो जाए कि अब एहद बाक़ी नहीं रहा, ताकि कोई बेईमानी की शक्ल न रह जाए।

अल्लाह तआ़ला ने साफ़ फ़रमा दिया कि वह ख़ियानत करने वालों को पसन्द नहीं करता।

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