Transliteration: (Allazeena'aahatta min hum summa yanqudoona 'ahdahum fee kulli marratinw wa hum laa yattaqoon)
यह आयत बनू क़ुरैज़ा के बारे में नाज़िल हुई। उन्होंने मदीना मुनव्वरा में हज़रत रसूलुल्लाह ﷺ के साथ मुआहिदा किया था कि:
मगर उन्होंने बार-बार ख़िलाफ़वऱ्ज़ी की। पहले तो मक्के के मुशरिकों की मदद की, फिर माफ़ी मांगकर दोबारा मुआहिदा किया, लेकिन फिर से कुफ़्फ़ार का साथ दिया।
यह आयत बताती है कि कुफ़्र अपने आप में बड़ा गुनाह है, लेकिन जब उसके साथ अहदशिकनी (बार-बार वादाख़िलाफ़ी) भी शामिल हो जाए तो यह और भी सख़्त गुनाह बन जाता है।
मुसलमानों को नसीहत दी गई है कि वे हमेशा वादों को पूरा करें, जैसा कि अल्लाह ने फ़रमाया:
"और अहद को पूरा करो, बेशक अहद के बारे में ज़रूर पूछा जाएगा।" (सूरा अल-इस्रा 17:34)
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