कुरान - 8:56 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
ٱلَّذِينَ عَٰهَدتَّ مِنۡهُمۡ ثُمَّ يَنقُضُونَ عَهۡدَهُمۡ فِي كُلِّ مَرَّةٖ وَهُمۡ لَا يَتَّقُونَ

Transliteration: (Allazeena'aahatta min hum summa yanqudoona 'ahdahum fee kulli marratinw wa hum laa yattaqoon)

वे लोग जिनसे तुमने अहद (मुआहिदा) किया, फिर वे हर बार अपने अहद को तोड़ डालते हैं और वे डरते नहीं [129]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 56 की तफ़्सीर

✅ [129] बनू क़ुरैज़ा की ख़ियानत के बारे में नाज़िल

यह आयत बनू क़ुरैज़ा के बारे में नाज़िल हुई। उन्होंने मदीना मुनव्वरा में हज़रत रसूलुल्लाह ﷺ के साथ मुआहिदा किया था कि:

  1. वे मुसलमानों के ख़िलाफ़ जंग नहीं करेंगे।
  2. और न ही दुश्मनों की मदद करेंगे।

मगर उन्होंने बार-बार ख़िलाफ़वऱ्ज़ी की। पहले तो मक्के के मुशरिकों की मदद की, फिर माफ़ी मांगकर दोबारा मुआहिदा किया, लेकिन फिर से कुफ़्फ़ार का साथ दिया।

यह आयत बताती है कि कुफ़्र अपने आप में बड़ा गुनाह है, लेकिन जब उसके साथ अहदशिकनी (बार-बार वादाख़िलाफ़ी) भी शामिल हो जाए तो यह और भी सख़्त गुनाह बन जाता है।

मुसलमानों को नसीहत दी गई है कि वे हमेशा वादों को पूरा करें, जैसा कि अल्लाह ने फ़रमाया:
"और अहद को पूरा करो, बेशक अहद के बारे में ज़रूर पूछा जाएगा।" (सूरा अल-इस्रा 17:34)

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