Transliteration: (Kadaabi Aali Fir'awna wallazeena min qablihim; kazzaboo bi Aayaati Rabbihim faahlaknaahum bizunoobihim wa aghraqnaa Aala Fir'awn; wa kullun kaanoo zaalimeen)
फ़िरऔन से पहले की क़ौमें — जैसे आद और समूद — अल्लाह की तरफ़ से बेइंतिहा नेमतों से नवाज़ी गई थीं। लेकिन उन्होंने नाशुक्री और बग़ावत की, तो अल्लाह ने उन्हें पूरी तरह हलाक कर दिया। यह आयत इस बात की ओर ध्यान दिलाती है कि पिछली क़ौमों का हाल पढ़ना और उनसे सबक़ लेना बहुत ज़रूरी है। जिस तरह गुनाहगारों के अंजाम की कहानियां इबरत देती हैं, उसी तरह औलिया अल्लाह की सवानह दिलों को अल्लाह की क़ुर्बत की तरफ़ खींचती हैं। इसी वजह से दोनों तरह की बातें क़ुरआन में बयान की गईं।
हालांकि फ़िरऔन की क़ौम में ज़ुल्म की शिद्दत सब में बराबर नहीं थी, लेकिन जब ज़ुल्म और गुनाह आम हो गया, तो अज़ाब ने सबको अपने घेरे में ले लिया। अल्लाह ने फ़रमाया कि वे सब ज़ालिम थे, इसलिए सबको ग़रक (डुबो कर हलाक) कर दिया गया। यह हक़ीक़त बताती है कि जब कोई समाज इंसाफ़ और नेकी से दूर होकर ज़ुल्म और गुनाह में डूब जाए, तो इलाही सज़ा सामूहिक रूप से सब पर उतरती है।
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