कुरान - 8:52 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
كَدَأۡبِ ءَالِ فِرۡعَوۡنَ وَٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ فَأَخَذَهُمُ ٱللَّهُ بِذُنُوبِهِمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ قَوِيّٞ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ

Transliteration: (Kadaabi Aali Fir'awna wal lazeena min qablihim; kafaroo bi Aayaatil laahi fa akhazahu mul laahu bizunoobihim; innal laaha qawiyyun shadeedul 'iqaab)

उनका मामला फ़िरऔन की क़ौम [122] और उन लोगों जैसा है जो उनसे पहले थे। उन्होंने अल्लाह की आयतों का इन्कार किया, तो अल्लाह ने उन्हें उनके गुनाहों के बदले में नष्ट कर दिया [123]। निःसंदेह, अल्लाह शक्ति वाला और कड़ी सज़ा देने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 52 की तफ़्सीर

✅ [122] अनुयायी भी "परिवार" कहे जाते हैं

इससे यह शिक्षा मिलती है कि अनुयायियों को भी परिवार कहा जाता है। फ़िरऔन, भले ही उसकी अपनी संतान न थी, लेकिन उसके पुलिस और सैनिकों की क्रूरता की वजह से उन्हें सामूहिक रूप से फ़िरऔन की क़ौम कहा गया। इसी अर्थ के आधार पर हज़रत मुहम्मद ﷺ के हर सहाबी और सच्चे अनुयायी को उनका रूहानी परिवार कहा जा सकता है।

✅ [123] दुनियावी और आख़िरती सज़ा, नबी ﷺ के लिए तसल्ली

अल्लाह ने उन लोगों को दुनिया में भी सज़ा दी और क़ब्र व आख़िरत में भी उन्हें अज़ाब दिया जाएगा। यह आयत हज़रत मुहम्मद ﷺ को तसल्ली देती है कि काफ़िरों की तक़ज़ीब (इन्कार) से दुखी न हों। ऐसा विरोध तो हमेशा से पैग़म्बरों के मिशन में होता आया है।

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