Transliteration: (Zaalika bimaa qaddamat aideekum wa anal laaha laisa bizallaamil lil 'abeed)
इसका तात्पर्य यह है कि क़ब्र में सज़ा सीधे व्यक्ति के अपने बुरे कर्मों का परिणाम होती है। हदीस में कहा गया है कि जो लोग मल-मूत्र से अपने आप को बचाने में असफल रहते हैं या बुराई करते हैं, उन्हें क़ब्र की अंधेरी सज़ा भोगनी पड़ेगी। इसके विपरीत, जो लोग मस्जिदों को रोशन करते हैं, उन्हें अपनी क़ब्र में रोशनी का इनाम मिलेगा। यह आयत पुष्टि करती है कि अल्लाह कभी अन्यायी नहीं है, और जो कुछ भी किसी आत्मा पर होता है, वह पूरी तरह उसके अपने कर्मों का परिणाम होता है।
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