कुरान - 8:49 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
إِذۡ يَقُولُ ٱلۡمُنَٰفِقُونَ وَٱلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ غَرَّ هَـٰٓؤُلَآءِ دِينُهُمۡۗ وَمَن يَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱللَّهِ فَإِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞ

Transliteration: (Iz yaqoolul munaafiqoona wallazeena fee quloobihim maradun gharra haaa'ulaaa'i deenuhum; wa mai yatawakkal 'alal laahi fa innal laaha 'azee zun Hakeem)

और जब मुनाफ़िक़ और जिनके दिलों में बीमारी है [115] कहते थे, ये मुसलमान अपने धर्म पर घमंड कर रहे हैं [116]। और जो कोई अल्लाह पर भरोसा करता है, बेशक अल्लाह बलवान और समझदार [117] है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 49 की तफ़्सीर

✅ [115] मुनाफ़िक़ों का संदेह और कमजोरी

जब मुनाफ़िक़ और कमजोर ईमान वाले नवमुसलमानों ने बदर में कुफ़्फ़ार की ताक़त देखी, तो उनका अंदर का संदेह और बीमारी बाहर आ गई। कुछ तो अपास्ती तक पहुँच गए। यह दर्शाता है कि आज़माइश दिल की हक़ीक़त प्रकट करती है, और असली ईमान वाले तथा दिखावे वाले अलग हो जाते हैं।

✅ [116] मुसलमानों के धर्म और साहस का मज़ाक

ये मुनाफ़िक़ मज़ाक उड़ाते हुए कहते थे कि मुसलमान अपने धर्म पर बहुत घमंड करते हैं। वे यह नहीं समझते थे कि छोटी और कमज़ोर ताक़त वाला समुदाय भी अल्लाह की मदद से शक्तिशाली सेना का सामना कर सकता है। उनकी बातों में दुनियावी ताक़त पर ज़्यादा भरोसा और ईमान की कमी झलकती है।

✅ [117] अल्लाह पर भरोसा सच्चे ईमान की निशानी

यह अल्लाह का जवाब है। जो कोई पूरी तरह अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए पर्याप्त है। अल्लाह सबसे बलवान और समझदार है। विजय संख्या या हथियारों पर नहीं, बल्कि तवक़्कुल (अल्लाह पर भरोसा) और दिव्य मदद पर निर्भर करती है। यह आयत दर्शाती है कि सच्ची ताक़त ईमान में है।

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