Transliteration: (Iz yaqoolul munaafiqoona wallazeena fee quloobihim maradun gharra haaa'ulaaa'i deenuhum; wa mai yatawakkal 'alal laahi fa innal laaha 'azee zun Hakeem)
जब मुनाफ़िक़ और कमजोर ईमान वाले नवमुसलमानों ने बदर में कुफ़्फ़ार की ताक़त देखी, तो उनका अंदर का संदेह और बीमारी बाहर आ गई। कुछ तो अपास्ती तक पहुँच गए। यह दर्शाता है कि आज़माइश दिल की हक़ीक़त प्रकट करती है, और असली ईमान वाले तथा दिखावे वाले अलग हो जाते हैं।
ये मुनाफ़िक़ मज़ाक उड़ाते हुए कहते थे कि मुसलमान अपने धर्म पर बहुत घमंड करते हैं। वे यह नहीं समझते थे कि छोटी और कमज़ोर ताक़त वाला समुदाय भी अल्लाह की मदद से शक्तिशाली सेना का सामना कर सकता है। उनकी बातों में दुनियावी ताक़त पर ज़्यादा भरोसा और ईमान की कमी झलकती है।
यह अल्लाह का जवाब है। जो कोई पूरी तरह अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए पर्याप्त है। अल्लाह सबसे बलवान और समझदार है। विजय संख्या या हथियारों पर नहीं, बल्कि तवक़्कुल (अल्लाह पर भरोसा) और दिव्य मदद पर निर्भर करती है। यह आयत दर्शाती है कि सच्ची ताक़त ईमान में है।
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