कुरान - 8:47 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَلَا تَكُونُواْ كَٱلَّذِينَ خَرَجُواْ مِن دِيَٰرِهِم بَطَرٗا وَرِئَآءَ ٱلنَّاسِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِۚ وَٱللَّهُ بِمَا يَعۡمَلُونَ مُحِيطٞ

Transliteration: (Wa laa takoonoo kallazeena kharajoo min diyaarihim bataranw wa ri'aaa'an naasi wa yasuddoona 'an sabeelil laah; wallaahu bimaa ya'maloona muheet)

और तुम उन लोगों की तरह न हो जाओ जो अपने घरों से घमंड में निकल खड़े हुए, लोगों को दिखाने के लिए [108], और अल्लाह के रास्ते से रोकने के लिए [109]। और अल्लाह उनके सारे कामों को घेरे हुए है [110]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 47 की तफ़्सीर

✅ [108] जंग में घमंड और दिखावा

इस आयत का ताल्लुक़ क़ुरैश के कुफ़्फ़ार से है जो बदर की जंग के लिए निकले। अबू सूफ़ियान ने जब अबू जहल को खबर दी कि काफ़िला महफ़ूज़ है और लड़ाई की ज़रूरत नहीं, तब भी उसने तकब्बुर और रियाकारी की वजह से जंग पर अड़ा रहा। नतीजा यह हुआ कि उनमें से ज़्यादातर मारे गए। मुसलमानों के लिए सबक़ है कि जिहाद घमंड या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ़ अल्लाह की राह में होना चाहिए।

✅ [109] कुफ़्फ़ार का असल मक़सद

कुफ़्फ़ार का जंग का असल इरादा यह था कि मुसलमानों को गुमराह करें और उन्हें अल्लाह और उसके रसूल ﷺ से रोकें। इसके बरअक्स मुसलमानों का मक़सद सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह के नाम को बुलंद करना और उसके रसूल ﷺ की मदद करना होना चाहिए।

✅ [110] अल्लाह का इहाता (घेर लेना)

अल्लाह उनके तमाम कामों को जानता और उन्हें घेर कर रखता है। इस दुनिया में उन्हें मोहलत दी गई है, मगर आख़िरत में उनके हर घमंड और हर बुरी नीयत का हिसाब होगा और वे बरहक सज़ा पाएंगे।

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