कुरान - 8:55 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
إِنَّ شَرَّ ٱلدَّوَآبِّ عِندَ ٱللَّهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فَهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Inna sharrad dawaaabbi 'indal laahil lazeena kafaroo fahum laa yu'minoon)

निश्चय ही अल्लाह के नज़दीक ज़मीन पर चलने वाले सबसे बदतर जीव वे हैं, जो कुफ़्र करते हैं [128] और ईमान नहीं लाते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 55 की तफ़्सीर

✅ [128] काफ़िर जानवरों से भी बदतर

इस आयत में अल्लाह तआ़ला ने काफ़िरों को जानवरों से भी बदतर बताया है। वजह यह है कि जानवरों के पास अक़्ल नहीं होती, न ही उन पर ईमान की तक़लीफ़त (ज़िम्मेदारी) डाली गई है। वे न तो कुफ़्र करते हैं और न ही शिर्क।
लेकिन इंसान को अल्लाह ने अक़्ल और समझ दी है। इसके बावजूद जो लोग हक़ को पहचान कर भी झुटलाते हैं, अल्लाह के दीन का इन्कार करते हैं और बग़ावत करते हैं — वही अल्लाह के नज़दीक सबसे बदतर मख़लूक़ात हैं।
यही वजह है कि जानवरों पर कोई अज़ाब नहीं, जबकि काफ़िर इंसानों पर इलाही अज़ाब मुकर्रर है।

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