कुरान - 8:57 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
فَإِمَّا تَثۡقَفَنَّهُمۡ فِي ٱلۡحَرۡبِ فَشَرِّدۡ بِهِم مَّنۡ خَلۡفَهُمۡ لَعَلَّهُمۡ يَذَّكَّرُونَ

Transliteration: (Fa immaa tasqafannahum fil harbi fasharrid bihim man khalfahum la'allahum yazzakkaroon)

तो अगर तुम उन्हें जंग में कहीं पाओ तो उन्हें इस तरह क़त्ल करो कि उनके पीछे वाले भाग खड़े होकर भाग जाएँ [130], शायद वे नसीहत हासिल करें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 57 की तफ़्सीर

✅ [130] जंग में रणनीतिक सख़्ती और हदूद-ए-शरीअत

इस आयत में हुक्म है कि जब ऐसे ख़ियानत करने वाले दुश्मन जंग में मिलें तो उन्हें इस क़दर सख़्ती और ग़लबा से मारो कि बाक़ी लोग भी ख़ौफ़ज़दा होकर भाग जाएँ और दोबारा दुश्मनी करने से बाज़ आएँ।

लेकिन इस्लाम ने जंग के लिए सख़्त उसूल भी बताए:

  • औरतों, बच्चों और बूढ़ों को क़त्ल करने की इजाज़त नहीं।
  • जानवरों को मारना, फ़स्लें जलाना या बर्बाद करना मना है।
  • सिर्फ़ हक़ीक़ी मुहारेब (लड़ने वाले दुश्मन) ही निशाना बनाए जाएँ।

मक़सद सिर्फ़ इतना है कि ख़ियानत करने वाले सबक़ लें और आगे फिर ग़द्दारी करने की हिम्मत न कर सकें।

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