कुरान - 8:67 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
مَا كَانَ لِنَبِيٍّ أَن يَكُونَ لَهُۥٓ أَسۡرَىٰ حَتَّىٰ يُثۡخِنَ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ تُرِيدُونَ عَرَضَ ٱلدُّنۡيَا وَٱللَّهُ يُرِيدُ ٱلۡأٓخِرَةَۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٞ

Transliteration: (Maa kaana li Nabiyyin ai yakoona lahooo asraa hatta yuskhina fil ard; tureedoona aradad dunyaa wallaahu yureedul Aakhirah; wallaahu 'Azeezun Hakeem)

किसी नबी के लिए यह मुनासिब नहीं कि वह कैदी बनाए जब तक कि वह ज़मीन में पूरी तरह ग़ालिब न हो जाए [149]। तुम दुनिया का माल चाहते हो [150], जबकि अल्लाह आख़िरत चाहता है [151]। और अल्लाह ग़ालिब, हिकमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 67 की तफ़्सीर

✅ [149] नबी का मक़ाम और जंग की गरिमा

इस आयत में यह हुक्म दिया गया कि किसी नबी के लिए यह शोभा नहीं देता कि बिना पक्की जीत के दुश्मनों को क़ैद कर ले। जंग का असल मक़सद दीन की इज़्ज़त और नबी ﷺ की सच्चाई को साबित करना है। इस से नबी की बहादुरी, क़ियादत और अल्लाह की मदद ज़ाहिर होती है।

✅ [150] बद्र के कैदियों का वाक़िया

ग़ज़वा-ए-बद्र में सत्तर कुफ़्फ़ार क़ैद किए गए। जब मशवरा लिया गया तो हज़रत अबू बक्र (रज़ि.) ने राय दी कि उन्हें फ़िदया लेकर छोड़ दिया जाए, ताकि उम्मीद है कि वह इस्लाम क़ुबूल कर लें और फ़िदये का माल इस्लाम की मदद में लगे। हज़रत उमर (रज़ि.) ने कहा कि इन्हें क़त्ल किया जाए क्योंकि यही कुफ़्र की जड़ हैं। नबी ﷺ ने अबू बक्र (रज़ि.) की राय को पसंद किया, लेकिन इस आयत के नाज़िल होने से अल्लाह ने वाज़ेह किया कि पहला मक़सद दीन की फ़तह हो, न कि माल-ए-दुनिया।

✅ [151] दुनिया पर आख़िरत की तरजीह

यहाँ "दुनिया का माल" से मुराद कैदियों से लिया गया फ़िदया है। अल्लाह तआला ने साफ़ कर दिया कि असली मक़सद आख़िरत की फ़लाह और दीन की इज़्ज़त है, न कि दुनियावी फ़ायदा। सहाबा का इरादा ग़लत नहीं था, क्योंकि वह माल-ए-ग़नीमत से इस्लाम की मदद चाहते थे, लेकिन अल्लाह ने उनकी तवज्जो आख़िरत की तरफ़ मोड़ दी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now