कुरान - 29:10 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَقُولُ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ فَإِذَآ أُوذِيَ فِي ٱللَّهِ جَعَلَ فِتۡنَةَ ٱلنَّاسِ كَعَذَابِ ٱللَّهِۖ وَلَئِن جَآءَ نَصۡرٞ مِّن رَّبِّكَ لَيَقُولُنَّ إِنَّا كُنَّا مَعَكُمۡۚ أَوَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِأَعۡلَمَ بِمَا فِي صُدُورِ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa minan naasi many yaqoolu aamannaa billaahi faizaaa ooziya fil laahi ja'ala fitnatan naasi ka'azaabil laahi wa la'in jaaa'a nasrum mir Rabbika la yaqoolunna innaa kunnaa ma'akum; awa laisal laahu bi a'lama bimaa fee sudooril 'aalameen)

और लोगों में से कोई ऐसा भी है जो कहता है कि 'हम अल्लाह पर ईमान लाए,' फिर जब अल्लाह की राह में उसे कोई तकलीफ़ दी जाती है तो वह लोगों की आज़माइश को अल्लाह के अज़ाब जैसा समझ लेता है [19]; और अगर आपके रब की तरफ़ से कोई मदद (फ़तह) आ जाए [20], तो वे ज़रूर कहेंगे कि 'हम तो तुम्हारे ही साथ थे [21]!' क्या जो कुछ तमाम जहान वालों के सीनों में है, अल्लाह उससे ख़ूब वाक़िफ़ नहीं [22]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 10

"और लोगों में से कोई ऐसा भी है जो कहता है कि 'हम अल्लाह पर ईमान लाए,' फिर जब अल्लाह की राह में उसे कोई तकलीफ़ दी जाती है तो वह लोगों की आज़माइश को अल्लाह के अज़ाब जैसा समझ लेता है [19]; और अगर आपके रब की तरफ़ से कोई मदद (फ़तह) आ जाए [20], तो वे ज़रूर कहेंगे कि 'हम तो तुम्हारे ही साथ थे [21]!' क्या जो कुछ तमाम जहान वालों के सीनों में है, अल्लाह उससे ख़ूब वाक़िफ़ नहीं [22]?"

[19] मुनाफ़िक़ों की बुज़दिली और कमज़ोर ईमान

यह मुनाफ़िक़ों और कच्चे ईमान वालों का ज़िक्र है जो आसानी के वक़्त तो ईमान का दावा करते हैं, मगर जैसे ही अल्लाह की राह में काफ़िरों की तरफ़ से कोई तकलीफ़ या सख़्ती आती है, तो उस दुनियावी आज़माइश से ऐसे घबरा जाते हैं जैसे वह अल्लाह का दायमी अज़ाब हो, और कुफ़्र की तरफ़ पलट जाते हैं।

[20] फ़तह और ग़नीमत के वक़्त का दिखावा

लेकिन जब मुसलमानों को फ़तह हासिल होती है और माले ग़नीमत मिलता है, तो फ़ौरन दावेदार बन जाते हैं कि हम तो तुम्हारे ही भाई और साथी हैं, हमें भी हिस्सा दो!

[21] झूठी हमदर्दी का इज़हार

उनका यह कहना कि हम तुम्हारे साथ थे, महज़ दुनियावी फ़ायदे और माल बटोरने के लिए होता है।

[22] दिलों के निफ़ाक़ से अल्लाह की बा-ख़बरी

अल्लाह तआला उनके सीनों में छुपे हुए इस निफ़ाक़ और लालच को ख़ूब जानता है, कोई दिखावा ख़ुदा की नज़र से छुप नहीं सकता।

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