कुरान - 29:11 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
وَلَيَعۡلَمَنَّ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَلَيَعۡلَمَنَّ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ

Transliteration: (Wa la ya'lamannal laahul lazeena aamanoo wa la ya'lamannal munaafiqeen)

और अल्लाह ज़रूर मोमिनों को ज़ाहिर फ़रमा कर रहेगा [23], और ज़रूर मुनाफ़िक़ों को भी ज़ाहिर फ़रमाएगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 11

"और अल्लाह ज़रूर मोमिनों को ज़ाहिर फ़रमा कर रहेगा [23], और ज़रूर मुनाफ़िक़ों को भी ज़ाहिर फ़रमाएगा।"

[23] मोमिन और मुनाफ़िक़ का खुला इम्तियाज़

अल्लाह तआला जिहाद, हिजरत और आज़माइशों के ज़रिए सच्चे और पक्के मोमिनीन के ईमान को रौशन फ़रमाएगा और मुनाफ़िक़ों के चेहरों से नक़ाब उलट कर उनकी रुसवाई को दुनिया और आख़िरत में ज़ाहिर फ़रमा देगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now