कुरान - 29:9 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ لَنُدۡخِلَنَّهُمۡ فِي ٱلصَّـٰلِحِينَ

Transliteration: (Wallazeena aamanoo wa'amilus saalihaati lanudkhilan nahum fis saaliheen)

और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए [18], हम ज़रूर उन्हें नेक बंदों (सालेहीन) में दाख़िल फ़रमाएंगे [19]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 9

"और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए [18], हम ज़रूर उन्हें नेक बंदों (सालेहीन) में दाख़िल फ़रमाएंगे [19]।"

[18] ईमान और आमाल-ए-सालिहा की अहमियत

सच्चा ईमान वही है जिसके साथ नेक आमाल हों। जो शख़्स अल्लाह की रज़ा के लिए दुनियावी तअल्लुक़ात की परवाह किए बग़ैर हक़ पर क़ायम रहता है, वही कामिल मोमिन है।

[19] सालेहीन की सोहबत और जन्नत का दाख़िला

अल्लाह तआला ऐसे मुख़्लिस मोमिनीन को दुनिया में भी औलिया और सालेहीन की जमाअत में शामिल फ़रमाता है और आख़िरत में भी अंबिया, सिद्दीक़ीन और शोहदा के साथ जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाएगा।

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