कुरान - 29:7 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنۡهُمۡ سَيِّـَٔاتِهِمۡ وَلَنَجۡزِيَنَّهُمۡ أَحۡسَنَ ٱلَّذِي كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Wallazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati lanukaf firanna 'anhum saiyiaatihim wa lanajziyannahum ahsanal lazee kaanoo ya'maloon)

और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए, हम ज़रूर उनकी बुराइयों को उनसे दूर कर देंगे [11] और उन्हें उनके बेहतरीन आमाल का अच्छा बदला देंगे [12]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 7

"और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए, हम ज़रूर उनकी बुराइयों को उनसे दूर कर देंगे [11] और उन्हें उनके बेहतरीन आमाल का अच्छा बदला देंगे [12]।"

[11] गुनाहों की माफ़ी और कफ़्फ़ारा

सच्चे ईमान और नेक आमाल की बरकत से अल्लाह तआला बंदों की पिछली ख़ताओं और गुनाहों को मिटा देता है और उन्हें अपने करम से बख़्श देता है।

[12] बेहतरीन बदला

अल्लाह तआला उनके छोटे-बड़े हर नेक अमल की क़द्र फ़रमाता है और उन्हें उनके आमाल से कई गुना बढ़कर जन्नत की नेमतों से नवाज़ता है।

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