कुरान - 29:5 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
مَن كَانَ يَرۡجُواْ لِقَآءَ ٱللَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ لَأٓتٖۚ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

Transliteration: (Man kaana yarjoo liqaaa 'allaahi fa inna ajalal laahi la'aat; wa Huwass Sameeul 'Aleem)

जो कोई अल्लाह से मुलाक़ात की उम्मीद रखता है [8], तो बेशक अल्लाह का मुक़र्रर कर्दा वक़्त ज़रूर आने वाला है [9]; और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 5

"जो कोई अल्लाह से मुलाक़ात की उम्मीद रखता है [8], तो बेशक अल्लाह का मुक़र्रर कर्दा वक़्त ज़रूर आने वाला है [9]; और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।"

[8] अल्लाह से मुलाक़ात और सवाब की उम्मीद

जो शख़्स अल्लाह की रज़ा, उसके दीदार और आख़िरत के इनाम व अज्र का उम्मीदवार है, उसे चाहिए कि दुनिया की तकलीफ़ों पर सब्र करे और नेकी में लगा रहे।

[9] मौत और क़ियामत का मुक़र्ररा वक़्त

अल्लाह तआला ने हर इंसान की मौत और क़ियामत का एक वक़्त मुक़र्रर फ़रमा रखा है जो यक़ीनन आकर रहेगा; उसमें एक लम्हे की भी ताख़ीर न होगी।

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