Transliteration: (Man kaana yarjoo liqaaa 'allaahi fa inna ajalal laahi la'aat; wa Huwass Sameeul 'Aleem)
"जो कोई अल्लाह से मुलाक़ात की उम्मीद रखता है [8], तो बेशक अल्लाह का मुक़र्रर कर्दा वक़्त ज़रूर आने वाला है [9]; और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।"
जो शख़्स अल्लाह की रज़ा, उसके दीदार और आख़िरत के इनाम व अज्र का उम्मीदवार है, उसे चाहिए कि दुनिया की तकलीफ़ों पर सब्र करे और नेकी में लगा रहे।
अल्लाह तआला ने हर इंसान की मौत और क़ियामत का एक वक़्त मुक़र्रर फ़रमा रखा है जो यक़ीनन आकर रहेगा; उसमें एक लम्हे की भी ताख़ीर न होगी।
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