कुरान - 29:12 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّبِعُواْ سَبِيلَنَا وَلۡنَحۡمِلۡ خَطَٰيَٰكُمۡ وَمَا هُم بِحَٰمِلِينَ مِنۡ خَطَٰيَٰهُم مِّن شَيۡءٍۖ إِنَّهُمۡ لَكَٰذِبُونَ

Transliteration: (Wa qaalal lazeena kafaroo lillazeena aamanut tabi'oo sabeelanaa walnahmil khataayaakum wa maa hum bihaamileena min khataa yaahum min shai'in innahum lakaaziboon)

और काफ़िरों ने ईमान वालों से कहा, 'हमारे रास्ते की पैरवी करो [24] और हम तुम्हारे गुनाह अपने ऊपर उठा लेंगे;' हालाँकि वे उनके गुनाहों में से कुछ भी उठाने वाले नहीं हैं [25]; बेशक वे बिल्कुल झूठे हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 12

"और काफ़िरों ने ईमान वालों से कहा, 'हमारे रास्ते की पैरवी करो [24] और हम तुम्हारे गुनाह अपने ऊपर उठा लेंगे;' हालाँकि वे उनके गुनाहों में से कुछ भी उठाने वाले नहीं हैं [25]; बेशक वे बिल्कुल झूठे हैं!"

[24] काफ़िरों का फ़रेब और बहकावा

कुरैश के सरदार कमज़ोर मुसलमानों से कहते थे कि तुम मुहम्मद (ﷺ) का दीन छोड़ दो और हमारे बुतों की पूजा करो; अगर क़ियामत में तुम्हें कोई सज़ा हुई तो तुम्हारे गुनाह हम अपने सर ले लेंगे।

[25] क़ियामत में दूसरों का बोझ न उठाना

अल्लाह ने वाज़ेह फ़रमाया कि उनका यह दावा सरासर झूठ और फ़रेब है। क़ियामत के दिन कोई शख़्स किसी दूसरे के गुनाह का एक ज़र्रा भी अपने सर नहीं ले सकेगा; हर एक को अपने ही अमल का हिसाब देना होगा।

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