कुरान - 29:15 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
فَأَنجَيۡنَٰهُ وَأَصۡحَٰبَ ٱلسَّفِينَةِ وَجَعَلۡنَٰهَآ ءَايَةٗ لِّلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Fa anjainaahu wa as haabas safeenati wa ja'alnaahaaa Aayatal lil'aalameen)

फिर हमने उन्हें [30] और कश्ती वालों को नजात दी, और उस कश्ती को तमाम जहानों के लिए एक निशानी (इबरत) बना दिया [31]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 15

"फिर हमने उन्हें [30] और कश्ती वालों को नजात दी, और उस कश्ती को तमाम जहानों के लिए एक निशानी (इबरत) बना दिया [31]।"

[30] कश्ती वालों की नजात

अल्लाह तआला ने हज़रत नूह और उनके साथ कश्ती में सवार होने वाले मोमिनीन को उस आलमगीर तूफ़ान से महफ़ूज़ फ़रमाया।

[31] कश्ती का इबरतनाक निशानी बनना

उस कश्ती और वाक़िए को कयामत तक आने वाली नस्लों के लिए कुदरत और नजात की अज़ीम निशानी बना दिया गया।

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