कुरान - 29:16 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
وَإِبۡرَٰهِيمَ إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُۖ ذَٰلِكُمۡ خَيۡرٞ لَّكُمۡ إِن كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa Ibraheema iz qaala liqawmihi' budul laaha wattaqoohu zaalikum khayrul lakum in kuntum ta'lamoon)

और इब्राहीम को (याद करो) [32], जब उन्होंने अपनी क़ौम से फ़रमाया, 'अल्लाह की इबादत करो [33] और उससे डरो; यह तुम्हारे लिए बहुत बेहतर है अगर तुम समझो; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 16

"और इब्राहीम को (याद करो) [32], जब उन्होंने अपनी क़ौम से फ़रमाया, 'अल्लाह की इबादत करो [33] और उससे डरो; यह तुम्हारे लिए बहुत बेहतर है अगर तुम समझो;"

[32] हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की दावत

हज़रत इब्राहीम ख़लीलुल्लाह ने अपनी बुतपरस्त क़ौम को सीधे रास्ते की तरफ़ बुलाया।

[33] तौहीद और तक़वा की तालीम

उन्होंने फ़रमाया कि सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करो जो तुम्हारा ख़ालिक़ है और उसके अज़ाब से डरो; यही तुम्हारे लिए दुनिया व आख़िरत की भलाई है।

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