कुरान - 29:18 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
وَإِن تُكَذِّبُواْ فَقَدۡ كَذَّبَ أُمَمٞ مِّن قَبۡلِكُمۡۖ وَمَا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ

Transliteration: (Wa in tukazziboo faqad kazzaba umamum min qablikum wa maa'alar Rasooli illal balaaghul mubeen)

और अगर तुम झुठलाओ [39], तो तुमसे पहले की उम्मतें भी झुठला चुकी हैं; और रसूल के ज़िम्मे तो बस साफ़-साफ़ पैग़ाम पहुंचा देना है [40]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 18

"और अगर तुम झुठलाओ [39], तो तुमसे पहले की उम्मतें भी झुठला चुकी हैं; और रसूल के ज़िम्मे तो बस साफ़-साफ़ पैग़ाम पहुंचा देना है [40]।'"

[39] झुठलाने वालों का बुरा अंजाम

अगर तुम मेरी दावत को झुठलाओगे तो अपना ही नुक़सान करोगे; पिछली उम्मतों ने भी झुठलाया था तो वे तबाह कर दी गईं।

[40] बिलाग़-ए-मुबीन (साफ़ पैग़ाम पहुंचाना)

रसूल की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ हक़ का पैग़ाम वाज़ेह तौर पर पहुंचा देना है, किसी को जबरदस्ती मोमिन बनाना उनका काम नहीं।

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