Transliteration: (Innamaa ta'budoona min doonil laahi awsaananw-wa takhluqoona ifkaa; innal lazeena ta'budoona min doonil laahi laa yamlikoona lakum rizqan fabtaghoo 'indal laahir rizqa wa'budoohu washkuroo lahooo ilaihi turja'oon)
"तुम तो अल्लाह को छोड़कर सिर्फ़ बुतों की पूजा करते हो [34] और सरासर झूठ घड़ते हो [35]; बेशक वे जिनकी तुम अल्लाह के सिवा इबादत करते हो वे तुम्हें कोई रिज़्क़ देने का इख़्तियार नहीं रखते [36], पस तुम अल्लाह ही के पास रिज़्क़ तलाश करो [37] और उसी की इबादत करो और उसी का शुक्र अदा करो [38]; उसी की तरफ़ तुम सब पलटाए जाओगे।"
हज़रत इब्राहीम ने दलील दी कि तुम अपने हाथों से तराशे हुए बेजान बुतों को पूजते हो जो न नफ़ा पहुंचा सकते हैं और न नुक़सान।
तुमने ख़ुद ही उन्हें माबूद और शफ़ीअ मान रखा है जो सरासर झूठ और बोहतान है।
वे तुम्हें एक दाना या पानी का एक घूंट भी देने की ताक़त नहीं रखते।
रोज़ी सिर्फ़ रज़्ज़ाक़-ए-हक़ीक़ी से मांगो जो आसमान व ज़मीन के ख़ज़ानों का मालिक है।
जब रिज़्क़ अल्लाह देता है तो इबादत और शुक्र भी उसी वाहिद परवरदिगार का होना चाहिए।
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