Transliteration: (Masalul lazeenat takhazoo min doonil laahi awliyaaa'a kamasalil 'ankaboot, ittakhazat baitaa; wa inna awhanal buyooti la baitul 'ankaboot; law kaanoo ya'lamoon)
"उन लोगों की मिसाल जिन्होंने अल्लाह के सिवा दूसरों को कारसाज़ (माबूद) बना रखा है, मकड़ी जैसी है [101] जिसने एक घर बना लिया [102]; और बेशक तमाम घरों से ज़्यादा कमज़ोर मकड़ी का घर है [103]; काश कि वे जानते [104]!"
यह मिसाल उन मुशरिकीन के लिए बयान की गई है जो अल्लाह को छोड़कर बुतों, मूर्तियों या मख़लूक़ को अपना माबूद और मुस्तक़िल कारसाज़ समझ लेते हैं। अल्लाह तआला के मुक़र्रब बंदे (अम्बिया व औलिया) अल्लाह के हुक्म और इज़्न से वसीला बनते हैं, मगर मुशरिकीन पत्थरों को ख़ुदाई इख़्तियारात का मालिक समझकर पूजते थे।
मकड़ी बड़ी मेहनत से अपना जाला बुनती है और समझती है कि यह उसका महफ़ूज़ घर है। ज़ाहिर में उसका जाला बड़ा फैला हुआ और खूबसूरत नज़र आता है, मगर हक़ीक़त में वह हवा के एक झोंके या उंगली के हलके से इशारे को भी बर्दाश्त नहीं कर सकता।
जिस तरह मकड़ी का जाला न धूप से बचा सकता है, न बारिश से और न ही किसी दुश्मन से, ठीक उसी तरह अल्लाह के सिवा झूठे माबूदों और बातिल अक़ीदों का सहारा बिल्कुल बे-बुनियाद और बे-असर है। मुसीबत के वक़्त वे किसी काम नहीं आ सकते।
काश ये लोग इतनी सी बात समझ लेते कि जब मुसीबत शदीद होती है तो वे भी अपने झूठे माबूदों को भूलकर सिर्फ़ एक अल्लाह को पुकारते हैं। औलिया-ए-किराम और अंबिया-ए-इज़ाम को वसीला जानना शिर्क नहीं, क्योंकि मोमिन उन्हें अल्लाह का बंदा समझकर अल्लाह की बारगाह में वसीला बनाता है, न कि ख़ुदा का शरीक।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat