कुरान - 29:43 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
وَتِلۡكَ ٱلۡأَمۡثَٰلُ نَضۡرِبُهَا لِلنَّاسِۖ وَمَا يَعۡقِلُهَآ إِلَّا ٱلۡعَٰلِمُونَ

Transliteration: (Wa tilkal amsaalu nadribuhaa linnaasi wa maa ya'qiluhaaa illal 'aalimoon)

और ये मिसालें हम लोगों के लिए बयान फ़रमाते हैं [107], और इन्हें सिर्फ़ अहले इल्म ही समझते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 43

"और ये मिसालें हम लोगों के लिए बयान फ़रमाते हैं [107], और इन्हें सिर्फ़ अहले इल्म ही समझते हैं।"

[107] क़ुरआनी मिसालों की हिकमत और अहले इल्म

अल्लाह तआला क़ुरआन पाक में आम इंसानों की समझाइश के लिए आसान और रोज़मर्रा की मिसालें (जैसे मक्खी, मकड़ी और जाला) बयान फ़रमाता है ताकि वे रूहानी हक़ायक़ को समझ सकें। मगर इन मिसालों की गहराइयों और रूहानी अस़रार को वही लोग समझ पाते हैं जिन्हें अल्लाह ने इल्म, बसीरत और ईमान की तौफ़ीक़ बख़्शी है। बे-इल्म लोग महज़ ज़ाहिर पर अटक कर रह जाते हैं, जबकि अहले इल्म हक़ीक़त तक पहुँचते हैं।

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