Transliteration: (Khalaqal laahus samaawaati wal arda bilhaqq; inna fee zaalika la aayatan lil mu'mineen (section 4))
"अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन को हक़ (हिकमत) के साथ पैदा फ़रमाया [108]; बेशक इसमें ईमान वालों के लिए बड़ी निशानी है [109]।"
आसमानों और ज़मीन की पैदाइश कोई इत्तिफ़ाक़ या बेकार खेल नहीं, बल्कि अल्लाह तआला ने इन्हें बड़ी हिकमत, इंसाफ़ और मक़सद के तहत पैदा फ़रमाया है। क़ायनात का हर ज़र्रा अल्लाह की वहदानियत और उसकी बे-मिसाल क़ुदरत की गवाही दे रहा है।
क़ायनात के निज़ाम में ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने से वही लोग हिदायत पाते हैं जिनके दिलों में ईमान का नूर होता है। मोमिन जब आसमानों की वुसअत और ज़मीन के हुस्न को देखता है तो उसका ईमान और पुख़्ता हो जाता है और उसकी ज़बान से बे-साख़्ता सुब्हानल्लाह निकलता है।
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