कुरान - 29:49 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
بَلۡ هُوَ ءَايَٰتُۢ بَيِّنَٰتٞ فِي صُدُورِ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَۚ وَمَا يَجۡحَدُ بِـَٔايَٰتِنَآ إِلَّا ٱلظَّـٰلِمُونَ

Transliteration: (Bal huwa aayaatum baiyinaatun fee sudooril lazeena ootul 'ilm; wa maa yajhadu bi aayaatinaa illaz zaalimoon)

बल्कि यह (क़ुरआन) रौशन आयात हैं [125] उन लोगों के सीनों में जिन्हें इल्म अता किया गया है; और हमारी आयात का इंकार सिर्फ़ ज़ालिम ही करते हैं [126]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 49

"बल्कि यह (क़ुरआन) रौशन आयात हैं [125] उन लोगों के सीनों में जिन्हें इल्म अता किया गया है; और हमारी आयात का इंकार सिर्फ़ ज़ालिम ही करते हैं [126]।"

[125] अहले इल्म के सीनों में महफ़ूज़ क़ुरआन

क़ुरआन मजीद का एक बड़ा मौजिज़ा यह है कि यह काग़ज़ के औराक़ के साथ-साथ हुफ़्फ़ाज़ और उलमा-ए-किराम के सीनों में महफ़ूज़ रहता है। दुनिया की कोई किताब इस तरह लाखों लोगों के सीनों में हरफ़-ब-हरफ़ महफ़ूज़ नहीं रही। जो दिल क़ुरआन का मस्कन बनते हैं, वे शैतान के शर से महफ़ूज़ और अल्लाह की रहमत के ख़ज़ाने हैं।

[126] ज़ालिमों की हठधर्मी

हमारी इन साफ़ और वाज़ेह निशानियों का इंकार सिर्फ़ वही लोग करते हैं जो अपनी जानों पर ज़ुल्म करते हैं और हक़ के सामने झुकने को तैयार नहीं होते।

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