Transliteration: (Wa qaaloo law laaa unzila 'alaihi aayaatum mir Rabbihee qul innamal aayaatu 'indal laahi wa innamaaa ana nazeerum mubeen)
"और उन्होंने कहा, 'उन पर उनके रब की तरफ़ से निशानियाँ (मौजिज़ात) क्यों न उतारी गईं?' [127] आप कह दीजिए, 'निशानियाँ तो सिर्फ़ अल्लाह ही के पास हैं [128], और मैं तो बस साफ़-साफ़ डराने (ख़बरदार करने) वाला हूँ।'"
कुफ़्फ़ारे मक्का अपनी हठधर्मी की वजह से मनमाने मौजिज़ात का मुतालबा करते थे, जैसे सोने का महल, ज़मीन से चश्मों का जारी होना या फ़रिश्तों का सामने आना। हालांकि हुज़ूर ﷺ के दस्ते मुबारक़ से ऐसे-ऐसे अज़ीम मौजिज़ात ज़ाहिर हुए जिनकी नज़ीर तारीख़ में नहीं मिलती (जैसे शक्कुल-क़मर और उंगलियों से पानी के चश्मे बहना)।
फ़रमा दीजिए कि मौजिज़ात का इज़हार अल्लाह की मर्जी और हिकमत के ताबे है। नबी का मक़सद जादूगरी दिखाना नहीं, बल्कि अल्लाह के अहकाम पहुँचाना और लोगों को नेक राह दिखाना और बुरे अंजाम से डराना है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat