कुरान - 29:52 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
قُلۡ كَفَىٰ بِٱللَّهِ بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمۡ شَهِيدٗاۖ يَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۗ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱلۡبَٰطِلِ وَكَفَرُواْ بِٱللَّهِ أُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ

Transliteration: (Qul kafaa billaahi bainee wa bainakum shaheedaa; ya'lamu maa fis samaawaati wal ard; wallazeena aamanoo bil baatili wa kafaroo billaahi ulaaa'ika humul khaasiroon)

आप कह दीजिए, 'मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाह के तौर पर काफ़ी है [132]; वह जानता है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है [133]; और जिन लोगों ने बातिल पर ईमान रखा और अल्लाह का इंकार किया, वही सबसे बड़ा नुक़सान उठाने वाले हैं [134]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 52

"आप कह दीजिए, 'मेरे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाह के तौर पर काफ़ी है [132]; वह जानता है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है [133]; और जिन लोगों ने बातिल पर ईमान रखा और अल्लाह का इंकार किया, वही सबसे बड़ा नुक़सान उठाने वाले हैं [134]।'"

[132] अल्लाह की गवाही सबसे आला

रसूलुल्लाह ﷺ की सिद्क़ व रिसालत पर सबसे बड़ी गवाही ख़ुद परवरदिगार की है जिसने आपको क़ुरआन जैसा मुअज्जिज़ कलाम अता फ़रमाया और आपकी नुसरत फ़रमाई। जब ख़ुदा गवाह हो तो किसी इंसान की तसदीक़ या तकज़ीब की कोई परवाह नहीं रहती।

[133] मुहीत इल्म-ए-इलाही

अल्लाह तआला आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ से वाक़िफ़ है। उसका इल्म हर ज़र्रे पर मुहीत है, लिहाज़ा उसकी गवाही में ज़र्रा बराबर भी शक की गुंजाइश नहीं।

[134] बातिल के पैरोकारों का नुक़सान

जिन्होंने सच को छोड़कर बातिल (शिर्क व बुतपरस्ती) को अपनाया और अल्लाह के अहकाम का इंकार किया, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में ख़सारे और नाकामी से दोचार होंगे।

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