कुरान - 29:53 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
وَيَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ وَلَوۡلَآ أَجَلٞ مُّسَمّٗى لَّجَآءَهُمُ ٱلۡعَذَابُۚ وَلَيَأۡتِيَنَّهُم بَغۡتَةٗ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ

Transliteration: (Wa yasta'jiloonaka bil'azaab; wa law laaa ajalum musammal lajaaa'ahumul a'zaab; wa la ya'tiannahum baghta tanw wa hum laa yash'uroon)

और वे आपसे अज़ाब की जल्दी मचा रहे हैं [135]! और अगर एक मुक़र्रर वक़्त तय न होता, तो उन पर अज़ाब आ चुका होता [136]; और वह अज़ाब ज़रूर उन पर अचानक आ पड़ेगा इस हाल में कि उन्हें ख़बर भी न होगी [137]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 53

"और वे आपसे अज़ाब की जल्दी मचा रहे हैं [135]! और अगर एक मुक़र्रर वक़्त तय न होता, तो उन पर अज़ाब आ चुका होता [136]; और वह अज़ाब ज़रूर उन पर अचानक आ पड़ेगा इस हाल में कि उन्हें ख़बर भी न होगी [137]।"

[135] अज़ाब की जल्दी मचाना

मुशरिकीन जैसे नज़र बिन हारिस वग़ैरा तंज़न कहते थे कि अगर आप सच्चे हैं तो हम पर आसमान से अज़ाब या पत्थर क्यों नहीं बरसा देते? वे अज़ाब की ताख़ीर को अपनी हक़्क़ानियत की दलील समझते थे।

[136] अज़ाब का मुक़र्रर वक़्त

अल्लाह तआला ने हर काम और हर सज़ा के लिए एक वक़्त मुक़र्रर कर रखा है। अगर वह मुअय्यन मुद्दत न होती तो उनकी गुस्ताख़ियों पर फ़ौरन अज़ाब आ जाता। इसके अलावा हुज़ूर ﷺ की जात-ए-मुबारका का दुनिया में तशरीफ़ फ़रमा होना भी अज़ाब-ए-इलाही से अमान का सबब था (वमा कानल्लाहु लियुआज़्ज़िबहुम व अंता फ़ीहिम)।

[137] अचानक अज़ाब की गिरफ़्त

जब अज़ाब का तयशुदा वक़्त आ जाएगा तो वह अचानक ऐसे वक़्त में पकड़ेगा जब वे ग़फ़लत और दुनियावी खेल-कूद में मस्त होंगे और उन्हें अज़ाब के आने का वहम-ओ-गुमान भी न होगा।

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