कुरान - 29:54 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
يَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةُۢ بِٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Yasta'jiloonaka bil'azaab; wa inna Jahannama la muheetatum bil kaafireen)

वे आपसे अज़ाब की जल्दी मचाते हैं, हालाँकि जहन्नुम तो काफ़िरों को (हर तरफ़ से) घेरे हुए है [138]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 54

"वे आपसे अज़ाब की जल्दी मचाते हैं, हालाँकि जहन्नुम तो काफ़िरों को (हर तरफ़ से) घेरे हुए है [138];"

[138] जहन्नुम का मुहीत होना

हज़रत सूफ़िया-ए-किराम फ़रमाते हैं कि कुफ़्र, गुनाह और नाफ़रमानी ख़ुद दुनिया में एक रूहानी जहन्नुम की मानिंद हैं जो गुनहगारों को हर तरफ़ से घेरे हुए है। जिस तरह ईमान और नेकी दुनिया में दिल का सुकून और जन्नती बहार है, उसी तरह कुफ़्र दुनिया में भी दिल की बेचैनी और आग है। और आख़िरत में तो जहन्नुम की हक़ीक़ी आग उन्हें हर सम्त से अपनी लपेट में ले लेगी।

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