कुरान - 29:51 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
أَوَلَمۡ يَكۡفِهِمۡ أَنَّآ أَنزَلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ يُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَرَحۡمَةٗ وَذِكۡرَىٰ لِقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Awa lam yakfihim annaaa anzalnaa 'alaikal kitaaba yutlaa 'alaihim; inna fee zaalika larahmatanw wa zikraa liqawminy yu'minoon (section 5))

क्या उनके लिए यह काफ़ी नहीं हुआ कि हमने आप पर किताब नाज़िल फ़रमाई [129] जो उन पर पढ़ी जाती है [130]? बेशक इसमें ईमान लाने वाले लोगों के लिए बड़ी रहमत और नसीहत है [131]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 51

"क्या उनके लिए यह काफ़ी नहीं हुआ कि हमने आप पर किताब नाज़िल फ़रमाई [129] जो उन पर पढ़ी जाती है [130]? बेशक इसमें ईमान लाने वाले लोगों के लिए बड़ी रहमत और नसीहत है [131]।"

[129] क़ुरआन करीम सबसे अज़ीम मौजिज़ा

हुज़ूर अकरम ﷺ का सबसे बड़ा और दायमी मौजिज़ा क़ुरआन मजीद है। जो लोग इस ज़िंदा और ला-जवाब कलाम को देखकर भी ईमान न लाएं, वे किसी दूसरे मौजिज़े को देखकर भी हरगिज़ ईमान नहीं लाएंगे।

[130] हमेशा बाक़ी रहने वाला मौजिज़ा

पिछले अम्बिया के मौजिज़ात वक़्ती थे और उनके जाने के बाद सिर्फ़ तारीख़ का हिस्सा बन गए, मगर क़ुरआन करीम क़यामत तक पढ़ा जाने वाला और अपनी हक़्क़ानियत का लोहा मनवाने वाला मौजिज़ा है जो हर दौर में तरोताज़ा है।

[131] अहले ईमान के लिए रहमत

क़ुरआन पाक तमाम जहानों के लिए हिदायत है, मगर इससे सच्चा फ़ायदा, रहमत और दिली सुकून वही लोग हासिल करते हैं जो इस पर ईमान लाते हैं और अपनी ज़िंदगी इसके सांचे में ढालते हैं।

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