कुरान - 7:123 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

123
قَالَ فِرۡعَوۡنُ ءَامَنتُم بِهِۦ قَبۡلَ أَنۡ ءَاذَنَ لَكُمۡۖ إِنَّ هَٰذَا لَمَكۡرٞ مَّكَرۡتُمُوهُ فِي ٱلۡمَدِينَةِ لِتُخۡرِجُواْ مِنۡهَآ أَهۡلَهَاۖ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Qaala Fir'awnu aamantum bihee qabla an aazana lakum; inna haaza lamakrum makartumoohu filmadeenati litukhrijoo minhaaa ahlahaa fasawfa ta'lamoon)

फ़िरऔन ने कहा: तुम लोग ईमान ले आए हो उससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति दूँ [256]। निस्संदेह, यह एक चाल है जो तुम लोगों ने शहर में रची है [257] ताकि इसके निवासियों को निकाल दो। तो जल्द ही तुम जान लोगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 123 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 123 की तफ़्सीर

 

✅ [256] ईमान लाने के लिए किसी की अनुमति ज़रूरी नहीं

फ़िरऔन ने घमंड से जादूगरों पर आरोप लगाया कि उन्होंने उसकी अनुमति के बिना ईमान क़ुबूल कर लिया। इससे उसका यह भ्रम सामने आया कि उसकी आज्ञा अल्लाह की इताअत से बढ़कर है। यहाँ "पहले" का अर्थ है "बिना अनुमति"। इस आयत से यह स्पष्ट होता है कि ईमान लाने या नमाज़ और हज जैसे फ़र्ज़ अदा करने के लिए किसी की इजाज़त की ज़रूरत नहीं। यह हक़ सीधे अल्लाह का है, जिसे बंदा किसी भी हाल में पूरा करेगा।

✅ [257] साज़िश का झूठा इल्ज़ाम

फ़िरऔन ने जादूगरों पर इल्ज़ाम लगाया कि उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) के साथ मिलकर सत्ता पलटने और लोगों को शहर से निकालने की योजना बनाई है। उसने यह भी कहा कि वे मूसा के शागिर्द हैं और पर्दे के पीछे साज़िश कर रहे थे। यह निराधार इल्ज़ाम उसकी शिकस्त और बेबसी को छिपाने का एक बहाना था। रिवायत के मुताबिक यह मुक़ाबला मिस्र के अलेक्ज़ान्द्रिया में हुआ, और फ़िरऔन का इल्ज़ाम दरअसल डर और हताशा की पैदावार था।

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