Transliteration: (La uqatti'anna aidiyakum wa arjulakum min khilaafin summa la usallibannakum ajma'een)
फ़िरऔन ने ज़ुल्म और बेबसी का इज़हार करते हुए ईमान वाले जादूगरों को धमकाया कि उनके हाथ-पाँव काटकर उन्हें सूली पर चढ़ाएगा, ताकि लोग डरकर ईमान न लाएँ। तफ़्सीर रूहुल बय़ान के मुताबिक़, सूली की सज़ा सबसे पहले फ़िरऔन ने ही ईजाद की थी। उसका मक़सद था लोगों को हक़ से रोकना। इसके मुक़ाबले में इस्लामी क़ानून में सज़ाएँ इंसाफ़ और हक़ के आधार पर होती हैं, न कि ज़ुल्म और ज्यादती पर।
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