कुरान - 7:124 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

124
لَأُقَطِّعَنَّ أَيۡدِيَكُمۡ وَأَرۡجُلَكُم مِّنۡ خِلَٰفٖ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُمۡ أَجۡمَعِينَ

Transliteration: (La uqatti'anna aidiyakum wa arjulakum min khilaafin summa la usallibannakum ajma'een)

मैं अवश्य ही तुम्हारे हाथों और पैरों को अलग-अलग तरफ़ से काट दूँगा, फिर तुम सबको सूली पर चढ़ा दूँगा [258]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 124 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आराफ़ – आयत 124 की तफ़्सीर

✅ [258] ईमान को कुचलने के लिए फ़िरऔन की धमकी

फ़िरऔन ने ज़ुल्म और बेबसी का इज़हार करते हुए ईमान वाले जादूगरों को धमकाया कि उनके हाथ-पाँव काटकर उन्हें सूली पर चढ़ाएगा, ताकि लोग डरकर ईमान न लाएँ। तफ़्सीर रूहुल बय़ान के मुताबिक़, सूली की सज़ा सबसे पहले फ़िरऔन ने ही ईजाद की थी। उसका मक़सद था लोगों को हक़ से रोकना। इसके मुक़ाबले में इस्लामी क़ानून में सज़ाएँ इंसाफ़ और हक़ के आधार पर होती हैं, न कि ज़ुल्म और ज्यादती पर।

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