कुरान - 7:136 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

136
فَٱنتَقَمۡنَا مِنۡهُمۡ فَأَغۡرَقۡنَٰهُمۡ فِي ٱلۡيَمِّ بِأَنَّهُمۡ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَكَانُواْ عَنۡهَا غَٰفِلِينَ

Transliteration: (Fantaqamnaa minhum fa'aghraqnaahum Fil'yammi Bi Annahum kazzaboo bi Aayaatinaa wa kaanoo 'anhaa ghaafileen)

फिर हमने उनसे बदला लिया [286] और उन्हें समंदर में डुबो दिया [287], क्योंकि उन्होंने हमारी आयतों को झुटलाया और उनसे ग़फ़लत बरती [288]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 136 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 136 की तफ़्सीर

✅ [286] पैग़म्बरों और मज़लूमों का इंतिक़ाम

  • अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और बनी इस्राईल के मज़लूमों की तरफ़ से इंतिक़ाम लिया।
  • सबक़ यह है कि अल्लाह अपने पैग़म्बरों का ख़ुद बदला लेता है, जबकि मज़लूमों का इंतिक़ाम अल्लाह अपने क़ुदरती निज़ाम से पूरा करता है।
  • उसका इंतिक़ाम देर से हो सकता है, मगर होता ज़रूर है और बिलकुल हक़ के साथ होता है।

✅ [287] समंदर में डूबो कर हलाक़ किया गया

  • फिरऔन और उसका पूरा लश्कर लाल समंदर (अल-यम्म) में ग़र्क़ कर दिया गया।
  • "यम्म" का मतलब है बहुत गहरा और वसीअ समंदर, जिसमें उनकी नजात नामुमकिन थी।
  • सबक़ यह है कि अल्लाह के हुक्म के सामने सबसे बड़े हाकिम और ताक़तवर भी बेबस और बेक़ुदरत हो जाते हैं।

✅ [288] जान बूझकर ग़फ़लत करने का अंजाम

  • आयत में "ग़फ़लत" का मतलब इल्म की कमी नहीं, बल्कि जान-बूझकर हक़ से मुँह मोड़ना है।
  • उन्होंने अल्लाह की निशानियों को पहचानने के बावजूद उन्हें झुटलाया और आँखें मूँद लीं।
  • इसलिए उनका अज़ाब मुकम्मल तौर पर बरहक़ और जायज़ था।
  • अल्लाह किसी को नादानी की वजह से अज़ाब नहीं देता, बल्कि जान-बूझकर इनकार करने वालों को पकड़ता है।

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