कुरान - 7:185 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

185
أَوَلَمۡ يَنظُرُواْ فِي مَلَكُوتِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا خَلَقَ ٱللَّهُ مِن شَيۡءٖ وَأَنۡ عَسَىٰٓ أَن يَكُونَ قَدِ ٱقۡتَرَبَ أَجَلُهُمۡۖ فَبِأَيِّ حَدِيثِۭ بَعۡدَهُۥ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Awalam yanzuroo fee malakootis samaawaati wal ardi wa maa khalaqal laahu min shai'inw wa an 'asaaa ai yakoona qadiqtaraba ajaluhum fa bi ayyi hadeesin ba'dahoo yu'minoon)

क्या ये लोग आसमानों और ज़मीन की बादशाहत [419] और वह सब चीज़ें जो अल्लाह ने पैदा की हैं [420], उन पर ग़ौर नहीं करते? हो सकता है कि उनकी मुद्दत क़रीब आ पहुँची हो [421]। फिर इसके बाद वे किस क़ौल पर ईमान लाएँगे? [422] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 185 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 185 की तफ़्सीर

✅ [419] आसमान व ज़मीन की बादशाहत पर ग़ौर

सारी हक़ीक़ी बादशाहत और मालिकियत सिर्फ़ अल्लाह की है। दुनियावी बादशाह केवल नाम के शासक होते हैं, मगर असली हुक्मरान अल्लाह ही है।

✅ [420] तमाम मख़लूक़ात में निशानियाँ

चाँद, सितारे, पहाड़, दरख़्त, नबातात और इंसान—हर चीज़ में अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ मौजूद हैं।

✅ [421] उम्र की मुद्दत का तज़किरा

हर इंसान को चाहिए कि अपनी आख़िरी घड़ी को याद रखे और नेक अमल में देर न करे। लंबी उम्र की झूठी उम्मीद ग़ाफ़िल बना देती है।

✅ [422] क़ुरआन और आख़िरी पैग़म्बरी

क़ुरआन आख़िरी किताब है और मुहम्मद ﷺ आख़िरी रसूल हैं। अगर कोई इस आख़िरी पैग़ाम पर ईमान नहीं लाता तो फिर उसके लिए हिदायत का कोई और दरवाज़ा बाक़ी नहीं रहता।

 

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