कुरान - 7:186 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

186
مَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَلَا هَادِيَ لَهُۥۚ وَيَذَرُهُمۡ فِي طُغۡيَٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ

Transliteration: (Mai yudlil lillaahi falaa haadiya lah; wa yazaruhum fee tughyaanihim ya'mahoon)

जिसे अल्लाह गुमराह कर दे [423], उसके लिए कोई हिदायत देने वाला नहीं। और वह उन्हें उनकी सरकशी में भटकने के लिए छोड़ देता है [424]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 186 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 186 की तफ़्सीर

✅ [423] अल्लाह की तरफ़ से गुमराही

वह इंसान जो लगातार गुनाहों और बुरे आमाल पर डटा रहता है, उसके दिल पर अल्लाह मुहर लगा देता है। फिर उसके लिए हिदायत का दरवाज़ा बंद हो जाता है। लेकिन जिसकी गुमराही अस्थायी हो, वह तौबा और नेक लोगों की सोहबत से फिर राह पर लौट सकता है।

✅ [424] अल्लाह की तरफ़ से छोड़ दिया जाना

जब अल्लाह किसी को उसकी ग़लत राह पर छोड़ देता है, तो यह उसी के लिए एक अज़ाब है। इसके मुक़ाबले में जिसे अल्लाह छोटी ग़लतियों पर भी रोक देता है, यह उसकी रहमत की निशानी है।

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