Transliteration: (Mai yudlil lillaahi falaa haadiya lah; wa yazaruhum fee tughyaanihim ya'mahoon)
वह इंसान जो लगातार गुनाहों और बुरे आमाल पर डटा रहता है, उसके दिल पर अल्लाह मुहर लगा देता है। फिर उसके लिए हिदायत का दरवाज़ा बंद हो जाता है। लेकिन जिसकी गुमराही अस्थायी हो, वह तौबा और नेक लोगों की सोहबत से फिर राह पर लौट सकता है।
जब अल्लाह किसी को उसकी ग़लत राह पर छोड़ देता है, तो यह उसी के लिए एक अज़ाब है। इसके मुक़ाबले में जिसे अल्लाह छोटी ग़लतियों पर भी रोक देता है, यह उसकी रहमत की निशानी है।
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