कुरान - 7:188 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

188
قُل لَّآ أَمۡلِكُ لِنَفۡسِي نَفۡعٗا وَلَا ضَرًّا إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُۚ وَلَوۡ كُنتُ أَعۡلَمُ ٱلۡغَيۡبَ لَٱسۡتَكۡثَرۡتُ مِنَ ٱلۡخَيۡرِ وَمَا مَسَّنِيَ ٱلسُّوٓءُۚ إِنۡ أَنَا۠ إِلَّا نَذِيرٞ وَبَشِيرٞ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Qul laaa amliku linafsee naf'anw wa laa darran illaa maa shaaa'al laah; wa law kuntu a'lamul ghaiba lastaksartu minal khairi wa maa massaniyas soo'; in ana illaa nazeerunw wa basheerul liqawminy yu'minoon)

कह दो: मैं अपने लिए न लाभ पहुँचा सकता हूँ और न हानि पहुँचा सकता हूँ, सिवाय इसके कि अल्लाह चाहे [433]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 188 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 188 की तफ़्सीर

✅ [433] मैं अपने लिए किसी लाभ या हानि का मालिक नहीं हूँ

✅ [434] लाभ और हानि अल्लाह की अनुमति से ही है

यह कथन इस बात की पुष्टि करता है कि जो शक्ति या भलाई रसूल ﷺ को मिली है, वह अल्लाह की अनुमति और अनुग्रह से मिली है।

✅ [435] ग़ैब का ज्ञान अल्लाह का दिया हुआ है

और अगर मैं ग़ैब (अनदेखे) को जानता होता [435], तो मैं अपने लिए बहुत-सा भला इकट्ठा कर लेता। यह इस बात की दलील है कि रसूल ﷺ को ग़ैब का ज्ञान अल्लाह की ओर से दिया गया है, न कि अपने बल से।

✅ [436–437] भलाई पाना और बुराई से बचना

तो मैं बहुत-सी भलाई हासिल कर लेता [436] और मुझ पर कोई बुराई न आती [437]। यानी जो कुछ भलाई और सुरक्षा रसूल ﷺ को मिली है, वह अल्लाह की ओर से है, न कि अपने आप।

✅ [438] ईमान वालों के लिए संदेश

मैं तो केवल एक डर सुनाने वाला और ख़ुशख़बरी देने वाला हूँ उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं [438]। यानी चेतावनी और शुभ सूचना केवल उन्हीं को लाभ देती है जो ईमान और ग्रहणशीलता रखते हैं।

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