कुरान - 7:187 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

187
يَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرۡسَىٰهَاۖ قُلۡ إِنَّمَا عِلۡمُهَا عِندَ رَبِّيۖ لَا يُجَلِّيهَا لِوَقۡتِهَآ إِلَّا هُوَۚ ثَقُلَتۡ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ لَا تَأۡتِيكُمۡ إِلَّا بَغۡتَةٗۗ يَسۡـَٔلُونَكَ كَأَنَّكَ حَفِيٌّ عَنۡهَاۖ قُلۡ إِنَّمَا عِلۡمُهَا عِندَ ٱللَّهِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Yas'aloonaka 'anis Saa'ati aiyaana mursaahaa qul innamaa 'ilmuhaa 'inda Rabbee laa yujalleehaa liwaqtihaaa illaa Hoo; saqulat fis samaawaati wal ard; laa ta'teekum illaa baghtah; yas'aloonaka ka annaka hafiyyun 'anhaa qul innamaa 'ilmuhaa 'indal laahi wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon)

वे आपसे क़ियामत के बारे में पूछते हैं कि वह कब आएगी [425]। कह दीजिए: उसका इल्म सिर्फ़ मेरे रब के पास है [426]। वही उसे उसके वक़्त पर ज़ाहिर करेगा [427]। वह आसमानों और ज़मीन पर भारी है [428]। वह तुम्हारे पास अचानक ही आ जाएगी [429]। वे आपसे ऐसे पूछते हैं जैसे आपने इसकी तहक़ीक़ की हो। कह दीजिए: इसका इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास है [431], लेकिन ज़्यादातर लोग नहीं जानते [432]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 187 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 187 की तफ़्सीर

✅ [425] नाज़िल होने का सबब

यहूदियों ने रसूलुल्लाह ﷺ से क़ियामत की तारीख़ पूछकर आपकी नबूवत को परखना चाहा। अल्लाह ने यह आयत उतारी और उनके दावे को झुठलाया।

✅ [426] इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास

इससे इंकार नहीं कि नबी ﷺ को क़ियामत के अलामात की खबर दी गई थी, लेकिन उसका असली वक़्त अल्लाह ही जानता है।

✅ [427] मुक़र्रर वक़्त पर ज़ाहिर होना

रसूलुल्लाह ﷺ को हुक्म था कि क़ियामत के ठीक समय को ज़ाहिर न करें, यह अल्लाह की हिकमत का हिस्सा है।

✅ [428] आसमानों व ज़मीन पर भारी होना

क़ियामत का वजूद और उसका आना तमाम मख़लूक़ — इंसान, जिन्न, फ़रिश्ते और जानवर — सबके लिए बेहद भारी और डरावना होगा।

✅ [429] अचानक आना

क़ियामत का आना अचानक होगा ताकि लोगों की आज़माइश बनी रहे। अगर वक़्त पहले से मालूम होता तो यह इम्तिहान बेअसर हो जाता।

✅ [431] असल इल्म अल्लाह के पास

क़ियामत का असल इल्म इंसानी अटकलों या तर्क से हासिल नहीं हो सकता। यह सिर्फ़ अल्लाह का रखा हुआ राज़ है।

✅ [432] अक़्सर लोगों की नादानी

अल्लाह तआला ने याद दिलाया कि ज़्यादातर लोग इस गहरी हक़ीक़त को नहीं समझते और ऐसे सवाल करते हैं जिनकी उन्हें समझ भी नहीं।

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