Transliteration: (Yas'aloonaka 'anis Saa'ati aiyaana mursaahaa qul innamaa 'ilmuhaa 'inda Rabbee laa yujalleehaa liwaqtihaaa illaa Hoo; saqulat fis samaawaati wal ard; laa ta'teekum illaa baghtah; yas'aloonaka ka annaka hafiyyun 'anhaa qul innamaa 'ilmuhaa 'indal laahi wa laakinna aksaran naasi laa ya'lamoon)
यहूदियों ने रसूलुल्लाह ﷺ से क़ियामत की तारीख़ पूछकर आपकी नबूवत को परखना चाहा। अल्लाह ने यह आयत उतारी और उनके दावे को झुठलाया।
इससे इंकार नहीं कि नबी ﷺ को क़ियामत के अलामात की खबर दी गई थी, लेकिन उसका असली वक़्त अल्लाह ही जानता है।
रसूलुल्लाह ﷺ को हुक्म था कि क़ियामत के ठीक समय को ज़ाहिर न करें, यह अल्लाह की हिकमत का हिस्सा है।
क़ियामत का वजूद और उसका आना तमाम मख़लूक़ — इंसान, जिन्न, फ़रिश्ते और जानवर — सबके लिए बेहद भारी और डरावना होगा।
क़ियामत का आना अचानक होगा ताकि लोगों की आज़माइश बनी रहे। अगर वक़्त पहले से मालूम होता तो यह इम्तिहान बेअसर हो जाता।
क़ियामत का असल इल्म इंसानी अटकलों या तर्क से हासिल नहीं हो सकता। यह सिर्फ़ अल्लाह का रखा हुआ राज़ है।
अल्लाह तआला ने याद दिलाया कि ज़्यादातर लोग इस गहरी हक़ीक़त को नहीं समझते और ऐसे सवाल करते हैं जिनकी उन्हें समझ भी नहीं।
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