कुरान - 7:4 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
وَكَم مِّن قَرۡيَةٍ أَهۡلَكۡنَٰهَا فَجَآءَهَا بَأۡسُنَا بَيَٰتًا أَوۡ هُمۡ قَآئِلُونَ

Transliteration: (Wa kam min qaryatin ahlaknaahaa fajaaa'ahaa ba'sunaa bayaatan aw hum qaaa'iloon)

और कितने ही नगर हमने तबाह कर डाले! फिर हमारा अज़ाब उन पर रात के वक़्त [4] या जब वे दोपहर में आराम कर रहे थे [5], आ पड़ा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 4 की तफ़्सीर

 

✅ [4] रात का वक़्त अल्लाह के क़हर और रहमत का समय

यह रात का आख़िरी हिस्सा है, ठीक सुबह से पहले का, जब लोग गहरी नींद में होते हैं और भागने का कोई रास्ता नहीं होता। इससे मालूम हुआ कि रात का आख़िरी हिस्सा अल्लाह की याद में मग्न लोगों के लिए रहमत का समय है और ग़ाफ़िल लोगों के लिए क़हर का समय। यही वजह है कि तहज्जुद की नमाज़ इस वक़्त सबसे ज़्यादा मुफ़ीद है, जिससे अल्लाह के ग़ज़ब की आग ठंडी होती है।

✅ [5] अज़ाब अचानक और बिना चेतावनी आता है

सारांश यह है कि अज़ाब उन पर ऐसे वक़्त आया जब उन्हें इसकी ज़रा भी उम्मीद न थी। ज़्यादातर पर रात के आख़िरी हिस्से में आया और कुछ पर उनके दोपहर के आराम के समय। इसकी कोई पूर्व चेतावनी न थी, बल्कि यह बिल्कुल अचानक और अनपेक्षित आया—वरना वे इत्मीनान से आराम न कर रहे होते।

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