कुरान - 2:186 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

186
وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِي عَنِّي فَإِنِّي قَرِيبٌۖ أُجِيبُ دَعۡوَةَ ٱلدَّاعِ إِذَا دَعَانِۖ فَلۡيَسۡتَجِيبُواْ لِي وَلۡيُؤۡمِنُواْ بِي لَعَلَّهُمۡ يَرۡشُدُونَ

Transliteration: (Wa izaa sa alaka 'ibaadee 'annnee fa innee qareebun ujeebu da'wataddaa'i izaa da'aani falyastajeeboo lee wal yu'minoo bee la'allahum yarshudoon)

और (ऐ महबूब!) जब मेरे बंदे आपसे मेरे बारे में पूछें, तो (बता दीजिए कि) मैं यक़ीनन क़रीब हूं; मैं पुकारने वाले की दुआ क़बूल करता हूं जब वह मुझे पुकारता है; पस उन्हें चाहिए कि मेरा हुक्म मानें और मुझ पर ईमान लाएं ताकि वे सही राह पर रहें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 186 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-बक़रह - आयत 186

✅ क़ुर्बे इलाही और दुआ की क़बूलियत

माहे रमज़ान के अहकाम के दरमियान दुआ की यह अज़ीम आयत आई है। अल्लाह बंदों की हर सदा सुनता है और जब बंदा इख़्लास से मांगता है तो उसकी दुआ क़बूल फ़रमाता है।

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